कुछ तो बात है,

कुछ तो खास बात थी उस शांम मे
कुछ तो अलग ही सुकून था उन राहो पे
शायद इसिलिए आज भी हर शांम
उस शाम की यादो मे एक खालीपन सा दे जाता है
शायद इसिलिए आज भी उन राहो पे
कुछ पल को ये मन बेचैन सा हो जाता है
कुछ अलग सी बात आज भी है
जो उन यादो को मन के किसी हिस्से मे संजोए रखे है
हा यारो कुछ बात तो है, उनसे जूरी हर बातो में
जो उन बातो की यादो मे एक बूँद से ही
उस लम्हे का समंदर उन यादो से भर जाता है,
की उन लम्हो की लहरों मे हम आज भी डूब से जाते है,
आज भी कही खो जाते है, कुछ पल को उन बातो मे कही
कुछ तो बात है उन बातो मे अलग सी मिटास है।
क्यूँ आज भी वो लम्हा एक अलग सी खुसी दे जाता है,
क्यूँ आज वो बीती बाते, मानो आज की लगती है
वो हर लम्हा उनसे जूरा आज भी
मन की गहराइयों मे कही अलग जगह बना रखा है।
कुछ तो बात है, हा कुछ तो बात है………..

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