रास्ते भी वही थे,

रास्ते भी वही थे, वो मोड़ भी वही था।
वो यादें भी तुम्हारी वही हैं, वो हंसना, वो रोना भी वही है।
वो तुझे एक पल को देख मेरा टेहर जाना,
वो सारी बाते, वो यादे बस वही कहीं है।
वो शाम भी दिन में एक बार उसी राह से गुजरती है,
वो शाम भी उन यादों के दरमियां, उस मंज़र को तलाशती है।

आज निकल पड़े थे हम भी उन यादों के दरमियां,
वो गलियां, वो मोड़, वो रास्ते, वो यादें, वो मंज़र, वो शाम।
आज भी लगते कुछ वैसे ही हैं, हर चीज़ तुझसे जुड़ी हुई है,
बस एक लम्हे सी दूरी को लगती ही है।
गुजरा है वक़्त हमारा सालों, पर तुझसे जुड़ी हर याद,
बस एक लम्हे की बात सी लगती है।

बारिश की बूंदें जब उन सड़कों पर पड़ीं,
हम भी कुछ पल ठहर से गए उस ओर कहीं।
धुल गई आज वो सारी यादें,
ऐसा लगा मानों तुम हो मेरे साथ, मेरे ही सामने।
बारिश की बूंदों में वो यादें कुछ यूहीं याद सी आईं,
मानों धुंधले यादों की तस्वीरें से, सामने किसी ने ले आई।

कोई शीशे की तस्वीर निकल कर सामने आई,
रास्ते आज भी वहीं हैं,
वो शाम आज भी हर दिन एक बार ज़रूर आती है,
पर जिसके दरमियाँ ये बातें हैं,
वो न जाने कहीं और ही गुम सी है,
कहीं और ही गुम सी है।

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