“मान लिया मैंने तू सही, मै गलत”

चलो मान लिया मैने
तू सही, तेरी हर बात सही
मान लिया की तेरे आशू की वजह भी मै
तेरे हर दर्द का कारन भी मै
मान लिया की तेरा हर गुस्सा जायज़ है
हा लो मान लिया की तू सही, मै गलत

बस इक बात मेरी भी सुनले
अपने मन के लिये नही, बल्कि
तेरी फिक्र थी इसलिए तुझे कॉल करता था,
तुझे दुख देने के लिये नही
तेरे दर्द को कम करने के लिये करता था
तेरी जिंदगी नर्क नही,
स्वर्ग बनाना चाहता था

याद है तेरी वो बात,
जो इक रात तुने मुझसे पुछा था
क्या दूँगा मै तेरे साथ हर पल, हर मुस्किल मे
तुझसे ना किया वादा मैने हर पल साथ निभाने का
डरता था मै कही टुट ना जाये किसी मोर पे ये
पर खुद किया उस रात ये वाद
चाहूँगा तुझे खुद से भी ज्यादा
जब तक रहेगी ये सासे तब तक निभाऊगा साथ तुम्हरा

तू साथ नही आज मेरे,
फिर भी फिक्र तेरी होती है मुझे
आज भी सपनो की राह मे,
पाता हूँ खुद को साथ तेरे
चल छोर ये बाते
मान लिया ना की मै गलत और तू सही
अब तो इक बर मूर तो सही तू
हाल मेरा मुझसे पुछ तो सही
की जिंदगी अब बस दो पल की है, मेरे दर्मियां
इक बार आकर मिल तो सही
चल छोर ये मिलने की बाते,
बस इक बर उस इन्सान से बात ही
करवा दे जिसे मै ढूंड रहा हू तुझ्मे कही

मान लिया यार तू ही सही, मै गलत……….

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