क्या बता दू तुम्हे मै,
की तेरी मुस्कुराहट मे एक अलग ही सुकून है,
तेरे पास होंने पे एक अलग ही ठेहराओ है।
की तेरे बातो मे कुछ यूही खो जाते हम
तुम्हे सुनते हुए पूरी रात भी गुजार सकते है अब तो।
क्या बता दू तुम्हे ये हाल अपना,
ये बेचैनी जो तेरे ना होने से मन को घेर लेती है
की अब खामोसी मे भी मेरा मन तुम्हे मेहसूस करने लगा है
के अब तुमसे दूर होना एक सज्जा सा लग्ने लगा है।
क्या बता दू तुम्हे क्या हो तुम मेरे लिये,
पयासे की बूँद जैसे, अंधरे का उजाला जैसे
की हर गीत अब तुमसे जूरी हुई लगती है
तुम्हारे हर मैसेज मे तुम्हारी आवाज़ सुनाई देती है।
क्या सब कह दूँ तुम्हे हर वो बात
जो मै खुद किया करता हू
हर बात जो मै तुमसे अपने खयलो मे बयाँ करता हूँ
क्या बयाँ कर्दू तुम्हे अपने अहसास
बयाँ कर्दू वो खुसी जो तुम्हारे पास होने पे मिलती है
की वो अकेलापन जो तुमसे दूर जाने के खयाल से ही होता है
वो हर जज़्बात जो इस मन मे है कही
हर बात जो मुझसे तुमसे ना जाने क्यूँ जोरे रखती है।
क्या बता दू तुम्हे?
क्या सब कुछ बता दू तुम्हे?……