तुम हो पास मेरे

जब मैं था अकेला पड़ा कही,तब तुमने हाथ बढ़ाया थालड़ रहा था जब खुद से मैं ,तब तुमने साथ निभाया…

” मै तलाशता हूँ खुद को “

मै तलाशता हूँ खुद को, इस अंधेरे में कहीं। कभी इन अनजान रास्तों में, तो कभी खुद में ही कहीं।…

रास्ते भी वही थे,

रास्ते भी वही थे, वो मोड़ भी वही था।वो यादें भी तुम्हारी वही हैं, वो हंसना, वो रोना भी वही…